
आज हम जानेंगे कि कौन है वो जिनके कारण भारत में श्वेत क्रांति आई और श्वेत क्रांति क्या थी इससे भारत में क्या प्रभाव पड़ा और इसमे किन लोगो का प्रमुख योगदान रहा है और किन्हे श्वेत क्रांति का जनक कहा जाता है और अंतिम में हम जानेंगे डॉ. वर्गीस कुरियन के जीवन के बारे में।
श्वेत क्रांति क्या थी?
श्वेत क्रांति एक अभियान थी जिसका मुख्य उद्देश्य दुग्ध उत्पादन बढ़ाना और डेयरी उद्योग को मजबूत करना था, श्वेत क्रांति को ऑपरेशन फ़्लड के नाम से भी जाना जाता है, इसका मुख्य उद्देश्य भारत में ग्रामीण किसानो को संगठित करना और दुग्ध उत्पादन को बढ़ाना था, इसी क्रांति के करण भारत में दुग्ध सहकारी समितियों का विकास हुआ, आज आप अमूल को देख पा रहे होंगे ये कंपनी श्वेत क्रांति का ही नतीजा है।
श्वेत क्रांति की सुरुआत किस वर्ष हुई थी?
श्वेत क्रांति की सुरुआत वर्ष 1970 में हुई थी और इसे ऑपरेशन फ़्लड के नाम से जाना जाता है,कुछ लोगों के ये भी मन्ना है कि श्वेत क्रांति की सुरुआत वर्ष 1965 में हुआ ना की 1970 में , आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 1965 के वर्ष में एनडीडीबी (राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड) को स्थापित किया गया था और बाद में इसी बोर्ड ने 1970 में ऑपरेशन फ़्लड की शुरुआत की जिसके कारण कुछ लोग ऐसा मानते हैं श्वेत क्रांति की सुरुआत वर्ष 1965 में हुई थी, अगर परीक्षा में लिखने वाले उत्तर की बात करें तो सही उत्तर 1970 है।
श्वेत क्रांति के जनक कौन हैं?
श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीस कुरियन हैं, जिन्होंने 1970 में ऑपरेशन फ्लड का नेतृत्व किया था, साथ ही उन्होंने अमूल डेयरी का राष्ट्रीय मॉडल बनाया था, उन्होंने किसानों को सीधे बाजार से जोड़ा, किसान अब सीधे दुग्ध संघों को बेच सकते थे और बिचौलियों की भूमिका को खत्म किया, जिसके कारण दूध बेचने वाले किसानों की आमदनी बढ़ी, उन्हें एनडीडीबी (राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड) की स्थापना की और प्रथम अध्यक्ष बने।
श्वेत क्रांति के करण भारत में क्या प्रभाव पड़ा ?
श्वेत क्रांति के करण आज भारत उन शीर्ष दुग्ध उत्पादन करने वाले देशो में शामिल हो चुका है जो दुनिया में सबसे ज्यादा दुग्ध उत्पादन करते हैं, आज की बात करें तो भारत दुनिया में दुग्ध उत्पादन करने वाले देशो में सबसे टॉप पर है , श्वेत क्रांति के कारण किसानों की आय भी बढ़ी लाखो लोगों को रोजगार मिला और पोषण के स्तर में सुधार आया।
डॉ. वर्गीस कुरियन का जीवन वृतान्त
डॉ. वर्गीस कुरियन का जन्म 26 नवंबर 1921 को कोझिकोड (केरल) में एक मध्यमवर्गीय ईसाई परिवार में हुआ था, उनके पिता डॉक्टर थे और उनकी माता जी टीचर थीं, वे बचपन से पढाई में काफी होशियार थे और उन्हें विज्ञान में काफी रुचि थी, अगर इनकी शिक्षा की बात करें तो अपना स्नातक गणित और भौतिकी में किया और फिर से केनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री ली, उसके बाद वे भारत सरकार के स्कॉलरशिप पर USA के मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी में पढ़ने गए और वहां से उन्होंने डेयरी इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री प्राप्त की ,भारत आते ही उन्हें आनंद गुजरात में एक छोटे डेयरी प्लांट में काम करने भेजा गया यहां उनकी मुलाकात त्रिभुवनदास पटेल से हुई जिन्होनें अमूल सहकारी आंदोलन शुरू किया था उनके बाद इन्होने इसी को अपना कैरियर मानकर अपना पूरा जीबन भारत की डेयरी व्यवस्था को सुधारने में लगा दिया ,इनकी मृत्यु 9 सितंबर 2012 में 90 साल की आयु में नाडियाड, गुजरात में बीमारी के कारण हुआ।
