टॉयलेट सीट हमेशा सफेद क्यों? वजह जानकर हैरान रह जाएंगे!

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क्या आपके भी मन में कभी ये सवाल आया है कि हमारे टॉयलेट सीट सफ़ेद रंग के ही क्यों बने होते हैं, अगर हां तो आज आपकी ये दुविधा खत्म हो जाएगी।

टॉयलेट सीट सफेद ही क्यों बनाई जाती है?

दुविधा को दूर करने से पहले चलो थोड़ा इसके इतिहास के बारे में जानते हैं।

टॉयलेट का इतिहास

शौचालय की सुरुआत किसी एक जगह से नहीं हुई अगर आज के मिले हुए पुरातात्विक साक्ष्यों को देखा जाए तो सबसे पहला शौचालय का साक्ष्य सिंधु घाटी सभ्यता में मिला है।

सबसे पहले टॉयलेट का साक्ष्य कहाँ मिला?

अगर देखा जाए तो ना सिर्फ सिंधु घाटी की सभ्यता में ही मिला है बाल्की मेशोपोटामिया की सभ्यता के लोग भी शौचालय का उपयोग करते थे।

सबसे पहले टॉयलेट का साक्ष्य कहाँ मिला?

पर सबसे पुराना और बेहतर शौचालय का सिस्टम सिंधु घाटी सभ्यता के लोग ही इस्तमाल करते थे।

सिंधु घाटी सभ्यता में प्लंबिंग सिस्टम, सीवर लाइन

चलो अब जरा जानते हैं टॉयलेट सीट का कलर सफेद ही कुन होता है, क्यों नहीं कोई दूसरा कलर इस्तमाल होता है।

टॉयलेट सीट सफेद ही क्यों

सबसे पहले कारण है कि टॉयलेट सीट जिस चीज से बनती है वो स्वाभाविक रूप से सफ़ेद रंग की होती है।

टॉयलेट सीट बनाने वाला मटेरियल

दूसरा सबसे मजबूत कारण  है कि सफेद रंग में गंदगी का पता ज्यादा चलता है और टॉयलेट को अच्छे से साफ करने में मदद मिलती है।

सफेद रंग में गंदगी तुरंत दिख जाती है

तीसरा कारण ये है कि अगर टॉयलेट को अलग रंग या पैटर्न में रंगा जाएगा तो वो महंगा हो जाएगा, उसकी कीमत बढ़ जाएगी।

अलग रंग का टॉयलेट सीट

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धन्यवाद